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 इतिहास - पेज- 3

डीसी कर्षण मोटर एवं नियंत्रण उपकरणों का उत्पादन अप्रैल 1967 में प्रारंभ किया गया। वर्तमान में डीसी एवं एसी दोनों प्रकार के कर्षण मोटरों का विनिर्माण किया जा रहा है। रेलइंजन पुर्जों की इस्पात ढलाई के विनिर्माण के लिए वर्ष 1962-63 में इस्पात फाउण्ड्री की स्थापना की गई। चिरेका में व्हील सेटों की मशीनिंग और एसेम्बली, बोगियों के फेब्रीकेशन व मशीनिंग आदि सुविधाएँ घरेलू स्तर पर मौजूद हैं। इनमें आधुनिक सीएनसी मशीनें, प्लाज्मा-कटिंग मशीनें, इनर्ट गैस वेल्डिंग सेट आदि सुविधाएं शामिल हैं।

 

चिरेका के उत्तरी क्षेत्र से होकर अजय नदी बहती है। कारखाना कार्यालय एवं क्वाटर चारों ओर से हरे-भरे पेड़ों एवं वृक्षों से घिरे हुए हैं एवं इनके बीच पर्याप्त दूरी है। यहां अनेक जलाशय हैं जो हरे-भरे पर्यावरण को दर्शाते हैं। ये जलाशय प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करते हैं। सालभर यहां विभिन्न प्रकार के वनस्पति एवं जीव जन्तु देखे जा सकते हैं।

पर्यावरण के प्रति सजग होने के बहुत पहले ही चिरेका प्रशासन ने शुष्क क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए वृक्षारोपण प्रारंभ किया। वर्ष 1996 में पश्चिम बंगाल सरकार के सोशल फॉरेस्ट्री डिविजन की मदद से 90,000 छोट-छोटे पौधे लगाए । उसी एजेंसी की मदद से वर्ष 2005 में भी 50,000 छोटे पौधे लगाए गए। प्रशासन लगातार कर्मचारियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक और परिरक्षित करने के लिए प्रोत्साहित करता रहता है। हाल ही में, पर्यावरण को संरक्षित करने की दृष्टि से काफी काम किया गया है, साथ ही सभी वर्तमान प्राकृतिक संसाधनों का पर्यावरण अनुकूल तरीके से उपयोग किया जा रहा है। ऐसे प्रयास को विश्व पर्यावरण फाउंडेशन ने मान्यता प्रदान की है एवं चिरेका को 9 जून 2006 को पर्यावरण प्रबंधन के लिए स्वर्ण मयूर पुरस्कार 2006 से नवाजा गया।

                                                                 

चिरेका ने पूरी तरह से औद्योगिक सुरक्षा अधिनियम 1948 के प्रावधानों का अनुपालन किया है। चिरेका अपनी संरक्षा नीति के संबंध में चित्तरंजन रेलइंजन कारखाना में कार्यरत सभी कर्मचारियों को 100%   संरक्षा सुनिश्चित करता है। चिरेका को संरक्षा नवीनीकरण पुरस्कार 2006 प्राप्त करने पर गर्व है। चिरेका को यह पुरस्कार संरक्षा एवं गुणवत्ता फोरम के इंजीनियरिंग संस्थान (भारत) ने 6 सितम्बर, 2006 को प्रदान किया। हमने वर्ष 2009 में भी उत्कृष्ट कार्य निष्पादन जारी रखा तथा चिरेका को 30.09.09 को पुनः सेफ्टी इनोवेशन से नवाजा गया।

 

चिरेका ने उत्कृष्ट कार्यनिष्पादन जारी रखा एवं 2009-10 में 220 लोको का रिकॉर्ड संख्या में उत्पादन सफलतापूर्वक किया। चिरेका ने 2009-10 में अपना हीरक जयंती वर्ष मनाया। इस वर्ष बहुत से कार्यक्रम आयोजित किए गए। चिरेका के हीरक जयंती वर्ष में कदम को स्मरणोत्सव मनाने के लिए एक पतंग प्रतियोगिता मार्च, 2009 में आयोजित की गई। हीरक जयंती वर्ष मनाते हुए इस कार्यक्रम को नगरी के निवासियों के साथ मनाया गया। इस वर्ष कुछ पार्कों का नवीनीकरण भी किया गया।

 

हेड योजना जेनरेशन (एचओजी) योजना सहित पहला विद्युत रेलइंजन ( डब्ल्यूएपी-7 प्रकार सं.30277) 30 जून, 2010 को महाप्रबंधक/चिरेका ने रवाना किया।

 

चित्तरंजन रेलइंजन कारखाना में पहला 3 फेज़ विद्युत रेलइंजन ( डब्ल्यूएजी-9 लोको सं.31291) कैब एयर कंडीशनिंग सुसज्जित कर रवाना किया गया एवं देश की सेवा में 31.01.2011 को समर्पित किया गया।

 

भारतीय स्टीम रेलवे सोसाइटी द्वारा 18 फरवरी, 2012 को राष्ट्रीय रेल संग्रहालय, नई दिल्ली में आयोजित इंडियन स्टीम रेलवे सोसाइटी के 9वें नेशनल स्टीम कॉंग्रेस कार्यक्रम में देश में वाष्प रेलइंजन उत्पादन में बेहतरीन योगदान के लिए चिरेका को सम्मानित किया गया। श्री संजीव हांडा, सदस्य यांत्रिक, रेलवे बोर्ड ने स्मृति चिह्न व प्रमाणपत्र प्रदान किए एवं इसे श्री राधे श्याम, महाप्रबंधक/चिरेका ने प्राप्त किया।

 

चिरेका की सहायक इकाई डानकुनी में विद्युत रेलइंजन अवयव कारखाना के कार्य का शुभारंभ उद्घाटन सुश्री ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल द्वारा 28 मई, 2012 को औपचारिक तौर पर किया गया।

 

रिकॉर्ड 270 विद्युत् रेल इंजन का निर्माण वर्ष 2012 -13

 




Source : Welcome to CLW Official Website ! CMS Team Last Reviewed on: 10-04-2019  

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