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इतिहास -पेज - 2

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1968 के दौरान डीजल हाइड्रॉलिक रेलइंजनों का उत्पादन शुरू हुआ। 5 प्रकार के 2351 वाष्प रेलइंजन और 7 प्रकार के 842 डीजल हाइड्रॉलिक रेलइंजनों का विनिर्माण करने के बाद वाष्प और डीजल हाइड्रॉलिक रेलइंजनों का उत्पादन क्रमशः 1973-74 एवं 1993-94 से बंद कर दिया गया।

 

वर्ष 1961 में विद्युत रेलइंजनो का उत्पादन प्रारंभ किया गया। इस प्रक्रिया में, चिरेका ने पन्द्रह प्रकार के विद्युत रेलइंजनों का उत्पादन किया एवं इस श्रृंखला में डब्ल्यूएजी-9i मालवाही रेलइंजन तथा डब्ल्यूएपी-7 यात्रीवाही रेलइंजन नवीनतम है। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 14 अक्टूबर 1961 को प्रथम 1500 वोल्ट डीसी रेलइंजन लोकमान्य का शुभारंभ किया। 25 केवी एसीडीसी रेलइंजनों का उत्पादन 16 नवम्बर 1963 से प्रारंभ हुआ। चिरेका द्वारा 2840 अश्वशक्ति का एक ब्रॉड गेज 25 केवीएसी अधिकतम गति 80 कि.मी घंटा का मालवाही प्रथम विद्युत रेलइंजन विधान         ( डब्ल्यूएजी-1) निकाला गया। बाद में चिरेका ने रेलइंजन की अश्वशक्ति 2840 से बढ़ाकर 6000 और अधिकतम गति  को 80 कि.मी.प्रति घंटा से बढ़ाकर 160 कि.मी.प्रति घंटा तक उन्नत किया। पश्चिम रेलवे में बीआरसी से बीसीटी तक मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों को खींचने के लिए चिरेका ने 25 केवीएसी/1500 वोल्ट डीसी, एसी/डीसी रेलइंजन भी निर्मित किए।

 

चिरेका अत्याधुनिक 3 फेज़ जीटीओ थॉयस्सिटर नियंत्रित विद्युत रेलइंजन एवं प्रथम स्वदेशी रूप से निर्मित 6000 अश्वशक्ति मालवाही विद्युत रेलइंजन डबल्यूएजी-9 का विनिर्माण कर विकासशील देशों में प्रथम, एशिया में द्वितीय एवं विश्व में पांचवी उत्पादन इकाई है। इसे नवयुग  नाम दिया गया एवं इसे 14 नवम्बर, 1998 से चालू किया गया। वर्ष 2000-01 में 3 फेज़ डब्ल्यूएपी-5 रेलइंजन नवोदित के यात्रीवाही वर्जन 160 कि.मी. प्रतिघंटा अधिकतम सेवा अवधि एवं 200 कि.मी./प्रति घंटा तक संभावित गति का विनिर्माण किया गया। 3 फेज़ रेलइंजनों के स्त्रोतों का विकास, स्वदेशीकरण तथा लागत में कमी उच्च प्रथमिकता वाली मदें हैं। आयायित 3 फेज़ रेलइंजन की उच्चतम लागत रू.35 करोड़ से घटाकर लगभग रू.12.5 करोड़ की गई। आशा है कि इसमें और अधिक कमी आएगी यदि चिरेका द्वारा इस प्रकार के रेलइंजन उत्पादन में वृद्धि की जाए।

 




Source : Welcome to CLW Official Website ! CMS Team Last Reviewed on: 30-11-2017  

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