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सतर्कता जागरुकता सप्ताह 2016

 

                  सतर्कता जागरुकता सप्ताह 2016

                        महत्वपूर्ण मामले

1.       एक निवारक जांच के दौरान यह देखा गया कि एक अभ्यर्थी ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति हेतु आवेदन किया और माध्यमिक का प्रमाण-पत्र जमा किया जिसमें जन्मतिथि 10/12/1993 दर्शाई गई थी। तथापि, उक्त अभ्यर्थी पहले एक अन्य बोर्ड से माध्यमिक परीक्षा में शामिल हुए थे जिसमें उनकी जन्मतिथि 11/11/81 दर्शाई गई थी। इन दो प्रमाण-पत्रों के अनुसार अभ्यर्थी की जन्मतिथि में 12 वर्षों का अंतर है। अभ्यर्थी ने पहले अपनी वास्तविक जन्मतिथि 11/11/1981 स्वीकार की थी। इसके बावजूद अधिकारियों ने अभ्यर्थी के शपथ-पत्र के आधार पर उसकी जन्मतिथि 10/12/1993 मानकर मामले पर कार्रवाई प्रारंभ की तथा नियुक्ति पत्र जारी किया गय़ा। इसके लिए ग्रेड-ए अधिकारी की जिम्मेवारी तय की गई और मामला बोर्ड के पास प्रथम चरण पर सुझाव हेतु भेजा गया।   

2.       चिरेका के प्रशासनिक अनुमोदन से चलाए जा रहे केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के साथ संबद्ध एक निजी विद्यालय को मुहैया करवाई जा रही विद्युत पावर आपूर्ति की अचानक सतर्कता जांच की गई। इस विद्यालय को चिरेका द्वारा 100 केवीए, 3 फेज की विद्युत आपूर्ति की जाती है। जांच के दौरान अगस्त 15 से मई 16 तक की अवधि में औसत मासिक ऊर्जा खपत केवल 207 केडब्ल्यूएच (यूनिट) पाई गई। यह भी पाया गया कि संबद्ध सीटी के साथ दो ऊर्जा मीटर समुचित तरीके से जोड़े एवं सीलबंद नहीं किए गए थे। सीटी के साथ संबद्ध मूल ऊर्जा मीटर जिन्हें विद्यालय के विद्युत कनेक्शन के समय जोड़ा गया था, इन्हें विद्यालय प्राधिकारी द्वारा डिसकनेक्ट कर दिया गया और इनके द्वारा उच्च रेटिंग वाले सीटी के साथ ऊर्जा मीटर का दूसरा सेट कनेक्ट कर दिया गया। इसके बाद, सीटी को मेव स्विच के साथ कनेक्ट कर दिया गया। इस प्रकार, कनेक्शन सामान्य विनिर्देशन के अनुसार नहीं पाया गया जिसके फलस्वरूप वास्तविक खपत के स्थान पर मीटर की गलत रीडिंग दर्शाई गई। मामले की और विस्तृत जांच की जा रही है।

3.       एक निवारक जांच के दौरान यह पाया गया कि एक फर्म ने फेराइट कोर की खरीद के लिए एक निविदा में मेसर्स वैक्यूममेल्ज जीएमबीएच एंड कं., केजी, जर्मनी (ओईएम एवं पार्ट-I चिरेका के अनुमोदित आपूर्तिकर्ता) से कथित तौर पर फर्जी प्राधिकरण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था। इस प्राधिकरण के आधार पर, इस फर्म को क्रय आदेश जारी किया गया। आरए/बर्लिन द्वारा सामग्री के निरीक्षण के दौरान फर्म ने मेसर्स वैक्यूममेल्ज जीएमबीएच एंड कं., केजी, जर्मनी द्वारा कथित रूप से जारी एक कार्य परीक्षण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जिसके आधार पर आरए/बर्लिन ने आईसी जारी किया। कार्य परीक्षण प्रमाण-पत्र भी फर्जी पाया गया। सामग्री को मेसर्स वैक्यूममेल्ज जीएमबीएच एंड कं., केजी, जर्मनी के पास यथार्थता के लिए भेजा गया। मेसर्स वैक्यूममेल्ज जीएमबीएच एंड कं., केजी, जर्मनी, ओईएम ने बताया कि आपूर्त सामग्री नकली है और इसे उनके द्वारा निर्मित नहीं किया गया है। इस प्रकार, फर्जी प्राधिकरण प्रमाण-पत्र तथा गलत सामग्री प्रस्तुत करने के कारण यह फर्म जालसाजी क्रियाकलाप में शामिल पाई गई। संबंधित क्रय आदेश के तहत फर्म को इस सामग्री के लिए भुगतान की गई राशि की वसूली सतर्कता से प्राप्त सुझाव के उपरांत की गई। इस फर्म को रेलवे के साथ कामन करने के लिए प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई की गई है।

4.       आरडीएसओ के विनिर्देशन सं. ईएलआरएस/स्पेक/एमपीसी-एफडीएस/0001(रिव.3अप्रैल, 2013) के अनुसार एसी लोको के लिए माइक्रोप्रोसेसर आधारित कंट्रोल एवं फॉल्ट डायग्नोस्टिक सिस्टम का आपूर्ति पर एक निवारक जांच की गई। चार फर्मों को इस सामग्री के कुल 83 सेटों की आपूर्ति हेतु आदेश दिया गया जिसमें से 3 फर्मों ने कुल 69 सेट सामग्री की आपूर्ति की। विनिर्देशन के अनुसार, चिरेका/क्षेत्रीय रेलों में  कॉनफिगरेशन डाटा सिस्टम के वेब पोर्टल में भेजा जाना था जिसके लिए सिस्टम सप्लाई करने वाली फर्म को सर्वर, मेमोरी, कॉमयूनिकेशन डिवाइस एंड सपोर्ट आदि की सुविधाएं मुहैया करवानी थी। अधिकारी पक्ष की ओर से यह पुष्टि की गई है कि आईआर सर्वर, मेमोरी, कॉमयूनिकेशन डिवाइस एंड सपोर्ट आदि चिरेका/क्षेत्रईय रेलों पर इंस्टॉल नहीं किए गए हैं। मामले की और विस्तृत जांच की जा रही है।

                                                                                                                                                                                                                          

5.   ठेकेदारों एवं आपूर्त्तिकर्ताओ के दावे के लिए बिल पास करने वाले मशीनरी की आंतरिक जाँच  के क्षेत्र में निवारक जाँच के परिणाम स्वरुप यह देखा गया कि एक फार्म को विभिन्न प्रकार के 300 आवासीय क्वार्टरों में रिपियरिंग का ठेका दिया गया । बिल को बनाने एवं लेखा परीक्षा एवं भुगतान हेतु लेखा विभाग को भेजने के क्रम मे यह पाया गया कि जिन प्रस्तावित क्वार्टरों के लिए बिल बनाया  गया था उसका उल्लेख मेजरमेन्ट बुक मे है ही नही । बल्कि सिर्फ क्वार्टरों की संख्या का उल्लेख किया गया है। इससे  एक ही  क्वार्टर के लिए दोबारा भुगतान का मार्ग प्रशस्त होता है। मेजरमेन्ट बुक में कार्य स्थान के संबंध में विस्तृत जानकारी के उल्लेख  हेतु प्रणाली सुधार करने सलाह दी गई है ।

6. डीए गैस के अंतिम लेखा जोखा के क्षेत्र में एक निवारक जाँच की गई है । भरे हुए सिलिंडरों का वजन किया गया और 2.24 Kg. औसत कमी पायी गई । यह भी देखा गया कि पिछले अवसरों पर सिलिंडरों का जब वजन किया गया एवं जाँच की गई तो सिर्फ 33 Kg. 0.29 Kg. एवं 0.23 Kg. की कमी पायी गई । इस प्रकार नमुने के आधार पर वजन करने से उद्देश्य पुरा नहीं हुआ । इस कार्यालय के प्रणली सुधार के तहत सिलिंडर प्राप्त करने एवं वापस करने दोनो वक्त 100% गैस का वजन करने का निर्देश दिया गया है । संबंधित कार्यकारियों द्वारा यथा निर्देशित निवारक कार्रवाई  के संबंध में परिपत्रित किया गया है जिसमें इस कार्यालय द्वारा प्रणाली सुधार करने की बात पर बल दिया गया है । उक्त के बावजूद, सतर्कत्ता जाँच के दौरान यह पाया गया कि दिए गए प्रक्रिया संबंधी निर्देशों का पालन नही किया गया तथा नमूना के आधार पर सिलिंडरों का वजन करना जारी था । कार्यकारी को इसलिए निर्देश दिया गया कि निर्देशों के पालन नही किये जाने के लिए दायी कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करें ।

7. एक शिकायत से संबंधित निवारक जाँच में यह पता चला कि चित्तरंजन रेलइंजन कारखाना, चित्तरंजन मे ट्रेड एप्रेन्टिस की नियुक्ति के लिए अपने आवेदन में एक एन जी कर्मचारी ने अपनी वास्तविक जन्म तिथि 29-11-1957 की जगह गलत रुप से 29-07-1956 भरा ताकि न्यूनतम 14 वर्ष के शर्त को पूरा कर सके । वास्तविक जन्म तिथि के अनुसार वह उक्त नियुक्ति के लिए अंडरएज (Underage) मे आता था और एपेन्टिस एक्ट 1961 के शर्त के अनुसार 14 वर्ष उम्र पूरा नहीं कर पाया था । इस संबंध में उत्तरदायित्व का निर्धारण किया गया एवं उक्त कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए भारी दण्ड की अनुशंसा की गई         

8.    एक शिकायत की पड़ताल के दौरान यह पाया गया कि एक एनजी कर्मचारी के वर्ष, 1996 में गलती से आरक्षित रिक्तियॉ के तहत् पदोन्नति दे दी गई जबकि वह कर्मचारी अनारक्षित श्रेणी का था । इस गलत पदोन्नति को प्रशासन द्वारा 2014 में पुन: वेतन निर्धारण के निर्देश के साथ सुधार कर दिया गया । पुन: वेतन निर्धारण के स्थान पर संबंधित डीलिंग सहायक ने उस कर्मचारी को वार्षिक वेतनवृद्धि  दे दिया तथा उसके सेवा पंजिका में छुट्टी नकदीकरण दर्ज कर  दिया । गलत रुप से पदोन्नति का लाभ पाने वाले उस कर्मचारी ने भी इस तथ्य को उजागार नही किया तथा करीब 20 वषों तक गलत वेतन के आधार पर लाभ लेता रहा । इसके लिए डीलिंग सहायक एवं कर्मचारी को उत्तरदायी बनाया गया तथा उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के तहत लधु दण्ड की अनुशंसा की गई है ।

 

 

 

Vigilance Awareness Week 2016

 

IMPORTANT CASE STUDIES

 

1.     During a preventive check, it was seen that a candidate applied for appointment on compassionate ground and submitted Matriculation Certificate showing date of birth as 10/12/1993. However, the candidate had earlier appeared in the Matriculation exam from another board where date of birth was shown as 11/11/1981.  There is a difference of 12 years in the date of birth of the candidate between the two certificates.  The candidate had earlier admitted to the fact of actual date of birth to be 11/11/1981. Inspite of this, the executives processed the case with date of birth as 10/12/1993 on the basis of candidate’s affidavit and issued the offer of appointment.  Responsibility has been fixed on Gr-A officer and the case has been sent to Board for 1st stage advice.

 

2.                 A surprise vigilance check was carried out to check the electrical power supply provided to a private school affiliated with Central Board of Secondary Education, functioning under the administrative approval of CLW.  The electrical power is fed by CLW to this school for 100KVA, 3 phase supply.  The average monthly energy consumption during the check was found to be only 207KWH (Unit) for the period of Aug’15 to May’16. It was also found that two nos. of energy meters with associated CTs are not properly connected and sealed.  The original energy meters with associated CTs which were connected during electrical connection to the school had been disconnected by the school authority itself and another set of energy meters with higher ratings of CTs have been connected by them.  Further, the CTs are connected after the main switch.  Thus, the connection was not found to be as per the usual specification resulting in display of incorrect reading than the actual consumption.  The case has been taken up for further detailed investigation.

 

3.                 During a preventive check, it was found that a firm had submitted fake authorization certificate allegedly from M/s Vacuumschmelze GmbH & Co., KG, Germany (OEM & Part-I approved supplier of CLW) in a tender for purchase of Ferrite Core.  On the basis of this authorization, a PO was placed on this firm.   During inspection of the material by RA/Berlin, the firm submitted a Work Test Certificate allegedly issued by M/s Vacuumschmelze GmbH & Co. KG, Germany based on which RA/Berlin issued the IC.  This Work Test certificate was also found to be fake.  The material was sent to M/s Vacuumschmelze GmbH & Co. KG, Germany for the check of genuineness.  M/s Vacuumschmelze GmbH & Co. KG, Germany, the OEM indicated that the supplied material is counterfeit and was not produced by them.  Thus, this firm has indulged in fraudulent activity by submitting fake authorization certificate and fake material.  Recovery of amount paid to the firm for this material against the said PO has been effected on advice from Vigilance. Banning of this firm from doing business with Railways has been processed. 

 

4.                 A Preventive check was conducted on supply of microprocessor based control and fault diagnostic system for AC Loco (CPU) as per RDSO Spec. no. ELRS/Spec/MPC-FDS/0001(Rev.3 April, 2013).  A total of 83 set of this material was awarded to four firm out of which three firms had supplied a total of 69 set material.  As per specification, the configuration data would be transmitted to the system’s web portal for which the firm supplying the system had to create facilities such as server, memory, communication device & support in CLW/Zonal Railways.  It has been confirmed from the executive side that the IR server, memory, space communication device and support are not installed in CLW/Zonal Railways.  The case has been taken up for further investigation.

 

5.                 As a result of a preventive check carried out in the thrust area of internal check machinery in bill passing of contractors and suppliers claim, it was seen that a firm was awarded the contract of rewiring of 300nos. of residential quarters of different Types.  It was found that while preparing the bill and forwarding it to the finance for audit and payment, the proper address of the quarters for which payment was proposed to be made was not recorded in the measurement book.  Rather, only the number of quarters was being mentioned.  This left a scope for repeat payment against the same quarters. A system improvement to incorporate details of the location of work in the measurement book has been advised.

 

6.                 A preventive check was carried out in the area of accountal of DA gas.  Filled cylinders were weighed and the average short fall was found to be 2.24Kg.  It was also seen that the cylinders were being weighed on a test check basis and average short receipt as per record in earlier occasions was seen as only 0.33Kg, 0.29Kg and 0.23Kg.  Thus, the weighment on sample basis was not serving its purpose.  This office had advised for 100% weighment of gas, both at the time of receipt and return of cylinders as a System Improvement.  Out of these, 5% cylinders were to be cross-checked in presence of a gazetted officer.  The corrective action as advised was also circulated by the concerned executives, reiterating the system improvement suggested by this office.  In spite of the above, it was found during the vigilance check that the suggested procedure was not being followed and weighment of cylinders on sampling basis was still being carried out.  The executive has, therefore, been advised to take up the responsible official under D&AR, for not carrying out the instructions.

 

7.                 During investigation of a complaint, it was found that an NG staff had falsely claimed his date of birth as 29.07.1956 in place of his actual date of birth as 29.11.1957 in his application for recruitment of Trade Apprentice at Chittaranjan Locomotive Works, Chittaranjan to satisfy the minimum age limit of fourteen years.   With his actual date of birth, he was underage for the above mentioned recruitment, not having completed fourteen years of age as per the terms of Apprentice Act, 1961.  For this, responsibility has been fixed and major penalty D&AR action has been recommended against him.

 

8.                 During investigation of a complaint, it was found that an NG staff was erroneously promoted in the year 1996 against a reserved vacancy, but the staff belongs to UR category.  This erroneous promotion was corrected by the Administration in the year 2014, with the instruction to re-fix his pay.  Instead of re-fixing the pay, the concerned dealing assistant drew annual increments in favour of the staff and recorded entries of leave encashments in the Service Record.  Even the staff, benefited by this erroneous promotion, did not highlight the matter and continued to draw the benefits on the basis of incorrect pay for over a period of almost 20 years.  For this, the dealing assistant and the staff have been held responsible.  Minor penalty D&AR action has been recommended against them.  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रणाली सुधार

1.    निविदा समिति का संविधान

      कुछ कारखाना संविदाओं की जाँच के दौरान यह देखा गया कि कुछ  निविदा के मामलों में निविदा समिति के दो सदस्य एक ही विभाग के हैं । इंजीनियर विभाग के भारतीय कोड के पैरा 1255 के अनुसार (संशोधित संस्करण,1982, चर्तुथ पुन र्मुद्रित, 2012).

      यह स्पष्ट है कि ऐसे संविदा के मामले मे तीसरा सदस्य दूसरे विभाग का होना चाहिए। उक्त के अनुसार उपमहाप्रबंधक को विभिन्न स्तरों पर विभिन्न प्रकार के संविदाओं के लिए निविदा समिति के तीसरे सदस्य के रुप स्थायी सूची बताने का निर्देश दिया गया है। यह भी सलाह दी गई है कि निविदा स्वीकृति प्राधिकारी के अर्न्तगत दो सदस्य नहीं होना चाहिए।

2.  एक नाम ब्रांड सहित नकली सामग्री के निवारक प्रयोग

    कार्य संविदा के संपादन क्षेत्र में निवारक जाँच करने के दौरान निविदा दस्तावेजों में यह देखा गया कि निश्चित ब्रांड नाम के मदों का उपयोग संविदा संपादन के लिए विर्निदिष्ट किए गए हैं। सतर्कता द्वारा संयुक्त निरीक्षण करने के दौरान यह पाया गया कि उपर्युक्त कार्य को क्रियान्वित करते समय जिस मद का उपयोग किया जा रहा था, निविदा आंमत्रित प्राधिकारी द्वारा मंगाए गए फर्म से नहीं बल्कि वही नाम ब्रांड स्थानीय तौर पर निर्मित था । निविदा में सिर्फ उल्लिखित ब्रांड की प्रणाली स्थापित करने के लिए एवं जिसके चलते नकली सामग्री देने की गुंजाइश रहती है, प्रणाली में सुधार के उपाय के रूप में कार्यपालकों को सलाह दी गई है कि निविदा अनुसूची में ओईएम का पूरा नाम व पता का उल्लेख किया जाए।

3. चयन समिति के सदस्यों का विवरण

  निवारक जाँच के दौरान यह पाया गया कि चयन समिति सदस्यों,  विभागीय चयन संचालन के नामित सदस्य ने रेलवे बोर्ड से समय-समय पर जारी अद्यतन नियम संबंधी ब्यौरा में उत्तर-पुस्तिका के मूल्यांकन संबंधी, प्रश्न-पत्र  सेटिंग करने एवं ऐसे चयन सहित संबंधी पहलुओं का विवरण नहीं दिया गया।

चयन प्रक्रिया का कार्यवृत्त भी नहीं दर्शाता है कि चयन समिति के सदस्य बोर्ड के पत्र सं. ई(एनजी)-।-96/पीएम1/5 दि.18.06.13 के आदेशानुसार निर्देशों का पालन करते हैं या नहीं। अतः यह सलाह दी जाती है कि बोर्ड के पत्रों के अनुपालन सुनिश्चित होना चाहिए।

 

4. मेजरमेंट बुक में निष्पादित कार्य के स्थान की रिकॉर्डिंग

  ठेकेदारों एवं आपूर्तिकर्ताओं के द्वारा प्रस्तुत बिल पास करने में आंतरिक जाँच मशीनरी क्षेत्र की निवारक जाँच की गई। विभिन्न प्रकार के आवासीय क्वाटरों में 300 जगहों पर पुनः वायरिंग की संविदा फर्म को दी गई थी । यह पाया गया कि बिल तैयार करते समय एवं इसे लेखा परीक्षा और भुगतान के लिए वित्त को अग्रेषित करने के दौरान, क्वाटरों के सही पते, जिसके लिए भुगतान करना प्रस्तावित था, मेजरमेंट बुक के रिकॉर्ड में नहीं था। जबकि सिर्फ कुछ ही क्वाटरों की संख्या उल्लिखित की गई थी, इससे उसी क्वाटरों के लिए पुनः भुगतान की संभावना बनती थी । अतः इस संभावना से बचने के लिए सुधार के लिए निम्न प्रणाली का सुझाव दिया जाता हैः-

आईआरईसी के पैरा 1320 के अनुसार संबंधित वअनुइंजी द्वारा कार्य के वास्तविक स्थान को मेजरमेंट बुक में उल्लिखित करना चाहिए। समूची प्रक्रिया को पारदर्शी व प्रमाणनीय बनाने के लिए विद्युत इंजीनियर द्वारा 20% टेस्ट जाँच भी की जानी चाहिए ताकि विनिर्दिष्ट क्वाटर  टेस्ट चेक के अंतर्गत आ रहा है।

5.    नियम के तहत मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए दर की अनुसूची में श्रम लागत को शामिल करना.

मजदूरी आधारित निविदाओं के क्षेत्र की निवारक जाँच की गई, यह पाया गया कि कूड़ा-करकट/अपशेष को हटाने, साफ करने व डम्पिंग के लिए अनुमानित लागत रु.15,38,740/- प्रतिवर्ष की निविदा आंमत्रित (फोलेटेड) की गई थी। निविदा दस्तावेजों में शर्त थी कि अनुमानित कार्य के लिए कम संख्या में श्रमिक काम पर रखे जाएं और यह संख्या 15 से कम नहीं होनी चाहिए। प्रस्तावित न्यूनतम बोली की दर रु.9,01,730/- थी। पश्चिम बंगाल अनुबंध में श्रमिक दर के न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत अनुमानित न्यूनतम मजदूरी रु.220/- प्रतिदिन है। अतः वर्षभर में 300 कार्य दिवस को ध्यान में रखते हुए, कम से कम 15 मजदूरों की मजदूरी सिर्फ रु.9,90,900/- होती है। इसी कारण से ऐसी पुनरावृत्ति से बचने के लिए प्रणाली सुधार उपाय में निविदा दस्तावेज में श्रम लागत की अनुसूची दर सम्मिलित होनी चाहिए, जहां कम संख्या में मजदूर अनुबंध करने का सुझाव दिया गया है। यह भी सलाह दी जाती है कि ठेकेदारों द्वारा मजदूरों को भुगतान, स्थल पर्यवेक्षक के साक्ष्य पर होना चाहिए।

 

 

 

 

S Y S T E M   I M P R O V E M E N T

 

1.      Constitution of Tender Committee

 

While investigating a few works contracts, it was seen that in some of the tender cases two members of the tender committee were from the same department.  As per Para 1255 of Indian Code For Engineering Department, (Revised Edition 1982, Fourth Re-print 2012) it is clear that 3rd member should be from another department who also deals with such contract matters.  As such DGM has been advised to constitute standing list of 3rd members of TC for various types of contracts at different levels.  It has also been suggested that no two members should be under the Tender Accepting Authority.

 

2.      Preventing use of spurious materials with the same brand name

 

During a preventive check carried out in the area of execution of Works Contract it was seen that in the tender document certain brand names of the items to be used were specified for execution of the contract. During a Joint Inspection carried out by Vigilance, it was found that the firm executing the said works was using the item with the same brand name manufactured locally and not from the firm intended by the Tender Inviting authority. To set right the system of only mentioning the brands in the tender and thereby giving a lee way for pushing in spurious material, a system improvement measure of mentioning full name and address of OEMs in the Tender schedule has been advised to the Executives.

 

3.      Briefing to Selection Committee members

 

During a preventive check, it was found that the selection committee members, nominated to conduct departmental selection, were not being briefed about the latest rules issued from time to time from Railway Board regarding evaluation of answer sheets, setting of question papers and related aspects with such selections.

Also minutes of the selection proceedings did not indicate whether the members of selection committee have gone through the instructions as mandated vide Board’s letter no. E(NG)I-98/PM1/15 dtd. 18/06/13.  Hence, it has been advised that the compliance of Board’s letter should be ensured.

 

4.      Recording of location of works executed in the Measurement Book

 

A preventive check was carried out in the area of internal check machinery in bill passing of contractors and suppliers claim. a firm was awarded the contract of rewiring of 300nos. of residential quarters of different types.  It was found that while preparing the bill and forwarding it to the finance for audit and payment, the proper address of the quarters for which payment was proposed to be made was not recorded in the measurement book.  Rather, only the number of quarters was being mentioned.  This left a scope for repeat payment against the same quarters. Therefore to weed out this possibility the following system improvement has been suggested:-

“The exact location of the work should be mentioned in the measurement book by the concerned SSE as per para 1320 of IREC.  Also the 20% test check being carried out by the Electrical Engineer should specify the quarters being covered under the test check to make the entire process transparent and verifiable.”

 

5.      Incorporating labour cost in the Schedule of rates to ensure payment of wages as per rules.

 

During a preventive check carried out in the area of wage oriented tenders, it was found that a tender was floated for sweeping cleaning and dumping of waste materials at an estimated cost of Rs. 15,38,740/- for a year. The tender document stipulated that the minimum number of labourers to be deployed should not be less than 15. The lowest bidder offered the rate of Rs. 9,01,730/-. The Minimum wages act of Labour rate at West Bengal stipulated the minimum wage as Rs.220/- per day. Therefore, considering the minimum working days as 300 round the year the wage factor for minimum 15 labourers alone accounted for Rs. 9,90,000/-. Therefore to avoid such recurrence a system improvement measure to incorporate the labour cost in the schedule of rates in the tender document where minimum number of labours has been stipulated has been advised. Also it has been suggested that payment to the labourer by the contractor should be witnessed by the site supervisors.

 

 

 



Source : Welcome to CLW Official Website ! CMS Team Last Reviewed on: 20-06-2017  

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